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चाहे तो भूखे रह जाना लेकिन इन चार जगहों पर बुलाने पर भी मत जाना chanakya vani

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चाहे तो भूखे रह जाना लेकिन इन चार जगहों पर बुलाने पर भी मत जाना chanakya vani

आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ रहे हैं, जिनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही सच साबित होती हैं, जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक चाणक्य नीति में जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण सिद्धांत बताए हैं।

इन्हीं सिद्धांतों में से एक है “स्वाभिमान के साथ जीना”। चाणक्य का मानना था कि इंसान को भूख बर्दाश्त कर लेनी चाहिए, लेकिन अपने आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। अक्सर लोग लालच या सामाजिक दबाव में ऐसी जगहों पर चले जाते हैं जहाँ उन्हें नहीं जाना चाहिए।

आज के इस लेख में हम उन्हीं चाणक्य वाणी के बारे में विस्तार से बात करेंगे, जिनमें बताया गया है कि किन चार स्थानों पर व्यक्ति को बुलाने पर भी नहीं जाना चाहिए। यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो आप समाज में अपनी इज्जत और गरिमा को बनाए रख सकते हैं।

चाणक्य वाणी: आत्मसम्मान और सामाजिक व्यवहार (Self-Respect and Ethics)

आचार्य चाणक्य ने स्पष्ट कहा है कि जो व्यक्ति अपने स्वाभिमान की रक्षा नहीं कर सकता, वह जीवन में कभी तरक्की नहीं कर पाता। उनके अनुसार, शरीर के पोषण से ज्यादा जरूरी आत्मा और सम्मान का पोषण है।

नीचे दी गई तालिका में चाणक्य नीति के मुख्य सिद्धांतों का एक संक्षिप्त अवलोकन दिया गया है, जो आपको यह समझने में मदद करेगा कि जीवन में किन बातों का सबसे अधिक महत्व है:

चाणक्य नीति और जीवन दर्शन का संक्षिप्त विवरण

विवरण का नाममहत्वपूर्ण जानकारी
मुख्य विषयचाणक्य नीति (चाणक्य वाणी)
केंद्र बिंदुस्वाभिमान और आत्मसम्मान
जीवन का मूल मंत्रअपमानित होकर जीने से अच्छा है भूख बर्दाश्त करना
महत्वपूर्ण ग्रंथचाणक्य नीति शास्त्र
लक्ष्यव्यक्ति को सामाजिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना
सावधानीगरिमाहीन स्थानों और लोगों से दूरी

इन चार जगहों पर बुलाने पर भी मत जाना (Avoid These 4 Places According to Chanakya)

आचार्य चाणक्य ने विस्तार से उन स्थितियों और स्थानों का वर्णन किया है, जहाँ जाना आपके व्यक्तित्व के लिए घातक हो सकता है। आइए जानते हैं वे कौन सी चार जगहें हैं:

1. जहाँ आपका मान-सम्मान न हो (Places Where You Are Not Respected)

चाणक्य के अनुसार, सबसे पहली जगह वह है जहाँ आपको सम्मान न मिले। यदि आपको किसी ऐसी जगह बुलाया गया है जहाँ लोग आपकी उपस्थिति को महत्व नहीं देते या आपका अपमान करते हैं, तो वहाँ कभी न जाएं।

अपमानित होकर खाना खाने से बेहतर है कि आप अपने घर में भूखे सो जाएं। चाणक्य कहते हैं कि जहाँ आदर नहीं, वहाँ प्रेम और सद्भावना कभी नहीं हो सकती। ऐसी जगह जाने से आपकी पर्सनैलिटी पर बुरा असर पड़ता है।

2. जहाँ रोजगार या आजीविका के साधन न हों (Places with No Livelihood)

चाणक्य नीति के अनुसार, व्यक्ति को ऐसी जगह पर भी नहीं रुकना चाहिए जहाँ रोजगार या कमाई का कोई जरिया न हो। आजीविका के बिना इंसान का जीवन कष्टकारी हो जाता है।

यदि कोई आपको ऐसी जगह आमंत्रित करता है जहाँ आपके कौशल (Skills) की कद्र न हो या जहाँ भविष्य में प्रगति की कोई संभावना न दिखे, तो वहाँ जाने का कोई फायदा नहीं है। आर्थिक मजबूती स्वाभिमान के लिए बहुत जरूरी है।

3. जहाँ धर्म और मर्यादा का पालन न हो (Places Void of Ethics and Dharma)

तीसरी जगह वह है जहाँ के लोग अधर्मी हों या जहाँ मर्यादाओं का उल्लंघन होता हो। चाणक्य का मानना था कि बुरी संगति और अनैतिक स्थान व्यक्ति के चरित्र को नष्ट कर देते हैं।

ऐसी सभाओं या समारोहों में जाने से बचें जहाँ गलत काम होते हों या जहाँ सत्य का अपमान किया जाता हो। चाणक्य वाणी के अनुसार, ऐसी जगहों पर जाने से आप भी पाप के भागीदार बन सकते हैं।

4. जहाँ कोई मित्र या सगा संबंधी न रहता हो (Places with No Known Well-wishers)

चाणक्य के अनुसार, इंसान को ऐसी जगह पर लंबे समय तक नहीं रुकना चाहिए जहाँ उसका कोई शुभचिंतक न हो। संकट के समय में केवल आपके करीबी ही आपके काम आते हैं।

अगर आप किसी अनजान जगह पर बिना किसी जान-पहचान के जाते हैं, तो आप खुद को जोखिम में डालते हैं। समाज में रहने के लिए आपसी मेल-जोल और भरोसेमंद लोगों का साथ होना अनिवार्य है।

चाणक्य नीति के महत्वपूर्ण सूत्र (Key Points of Chanakya Niti)

चाणक्य ने जीवन को सफल बनाने के लिए कुछ और भी महत्वपूर्ण बातें कही हैं, जिन्हें हर इंसान को गांठ बांध लेनी चाहिए:

  • आत्मसम्मान सर्वोपरि: कभी भी अपनी तुलना दूसरों से करके खुद को कम न समझें।
  • सतर्कता: हमेशा अपनी योजनाएं गुप्त रखें और दुश्मनों से सावधान रहें।
  • ज्ञान की शक्ति: शिक्षा ही वह एकमात्र हथियार है जो आपको हर परिस्थिति में बचा सकती है।
  • शर्म का त्याग: पैसे के लेन-देन और शिक्षा प्राप्त करने में कभी शर्म न करें।

आचार्य चाणक्य की ये बातें आज के युग में भी पूरी तरह सटीक बैठती हैं। यदि हम अपने जीवन में इन नियमों का पालन करें, तो हम न केवल सफल होंगे बल्कि समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान भी प्राप्त करेंगे।

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