हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का बहुत महत्व है। माना जाता है कि नियम के साथ की गई पूजा से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। लेकिन अक्सर अनजाने में हम कुछ ऐसी छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका बुरा असर हमारे जीवन पर पड़ सकता है।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान की भक्ति में पवित्रता और सही विधि का होना अनिवार्य है। गलत तरीके से की गई अर्चना से पुण्य फल की प्राप्ति नहीं होती। इसलिए घर के मंदिर में दीपक जलाने से लेकर भगवान को तिलक लगाने तक, हर काम के लिए कुछ खास धार्मिक नियम बनाए गए हैं।
इन नियमों का पालन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। आइए जानते हैं पूजा-पाठ के दौरान ध्यान रखने योग्य उन जरूरी बातों के बारे में, जो आपके जीवन में खुशहाली ला सकती हैं।
Puja Path Rules and Important Tips: पूजा के नियम
पूजा करते समय सबसे मुख्य बात यह है कि कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति एक जलते हुए दीपक से दूसरा दीपक जलाता है, वह धीरे-धीरे दरिद्र और रोगी होने लगता है। ऐसा करने से घर की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका रहती है। हमेशा नए दीपक को माचिस या किसी अन्य स्रोत से ही जलाना चाहिए।
इसके अलावा, देवी-देवताओं को तिलक लगाने का भी एक विशेष विधान है। भगवान को हमेशा अनामिका अंगुली (Ring Finger) से ही तिलक लगाना चाहिए। अंगूठे या किसी अन्य अंगुली का प्रयोग करना उचित नहीं माना जाता। तिलक लगाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन में स्थिरता आती है। शास्त्रों में चंदन, कुमकुम और हल्दी के तिलक का अलग-अलग महत्व बताया गया है।
Lighting Lamp Rules: दीपक जलाने के सही नियम
हिंदू शास्त्रों में दीप प्रज्ज्वलन को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना गया है। दीपक जलाते समय इस बात का ध्यान रखें कि दीपक खंडित (टूटा हुआ) न हो। खंडित दीपक जलाने से घर में वास्तु दोष पैदा होता है। अगर आप घी का दीपक जला रहे हैं, तो उसमें रुई की सफेद बत्ती का उपयोग करें। वहीं, तेल के दीपक के लिए लाल धागे या कलावा की बत्ती श्रेष्ठ मानी जाती है।
दीपक की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। पूर्व दिशा की ओर लौ रखने से आयु बढ़ती है और उत्तर दिशा की ओर रखने से धन लाभ होता है। कभी भी दीपक की लौ को दक्षिण दिशा की ओर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता और इससे घर में क्लेश बढ़ सकता है। पूजा खत्म होने के बाद भी दीपक को स्वयं नहीं बुझाना चाहिए, उसे अपने आप शांत होने देना चाहिए।
Tilak Vidhi and Rituals: तिलक लगाने का सही तरीका
देवी-देवताओं का श्रृंगार बिना तिलक के अधूरा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, देवताओं को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाते समय श्रद्धा का भाव होना चाहिए। तिलक हमेशा नीचे से ऊपर की ओर लगाना चाहिए। भगवान को तिलक लगाने के बाद बचे हुए तिलक को अपने माथे पर प्रसाद स्वरूप लगाना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है।
विभिन्न देवताओं के लिए अलग-अलग तिलक का महत्व है। जैसे भगवान विष्णु के लिए पीला चंदन, शिव जी के लिए भस्म या सफेद चंदन, और मां दुर्गा के लिए लाल कुमकुम का प्रयोग सबसे उत्तम माना जाता है। तिलक लगाते समय ‘अक्षत’ यानी साबुत चावल का प्रयोग जरूर करना चाहिए, क्योंकि अक्षत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
Puja Path Precautions: पूजा में ध्यान रखने योग्य अन्य बातें
पूजा के दौरान कुछ अन्य महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना भी अनिवार्य है:
- आसन का प्रयोग: बिना आसन के बैठकर पूजा नहीं करनी चाहिए, इससे पूजा का फल भूमि में चला जाता है।
- गंगाजल की पवित्रता: गंगाजल को कभी भी प्लास्टिक की बोतल में न रखें, तांबे या पीतल का पात्र ही प्रयोग करें।
- तुलसी के पत्ते: रविवार, एकादशी और शाम के समय तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए।
- शंख बजाना: पूजा के बाद शंख बजाना बहुत शुभ होता है, इससे वातावरण की अशुद्धियां दूर होती हैं।
- बासी सामग्री: भगवान को कभी भी बासी फूल या मुरझाई हुई माला अर्पित न करें।
- गणेश वंदना: किसी भी पूजा की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश की आराधना से ही करनी चाहिए।
- परिक्रमा के नियम: भगवान की पूजा के बाद उनकी परिक्रमा जरूर करें, जैसे विष्णु जी की चार और देवी माँ की एक बार।
- क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में अनजाने में हुई गलतियों के लिए भगवान से क्षमा याचना जरूर मांगनी चाहिए।
घर में नियमित रूप से आरती और मंत्र जप करने से वातावरण शुद्ध रहता है। यदि आप इन छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपकी पूजा सफल होती है और घर में खुशहाली आती है।

















