वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारे घर में मौजूद हर वस्तु का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है। विशेष रूप से पेड़-पौधे, जो जीवित ऊर्जा के स्रोत होते हैं, घर की सुख-समृद्धि को घटा या बढ़ा सकते हैं। श्री कृष्ण के उपदेशों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, प्रकृति का सम्मान करना अनिवार्य है, लेकिन कुछ विशेष प्रकार के पेड़ घर की सीमा के भीतर या उसके बिल्कुल पास लगाने से धन हानि और मानसिक तनाव हो सकता है।
पौराणिक मान्यताओं और वास्तु नियमों के अनुसार, गलत दिशा या गलत प्रकार के पौधे लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। कई बार हम अनजाने में सजावट के लिए ऐसे पौधे ले आते हैं जो दिखने में तो सुंदर होते हैं, लेकिन उनका प्रभाव परिवार की आर्थिक स्थिति को बिगाड़ सकता है। इसी संदर्भ में, आज हम उन 2 प्रमुख प्रकार के पेड़ों के बारे में जानेंगे जिन्हें घर के पास लगाने की मनाही की गई है।
यह जानकारी न केवल आपकी धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी छिपे हैं। अगर आप भी अपने घर में खुशहाली और महालक्ष्मी का वास चाहते हैं, तो इन वास्तु टिप्स को समझना और अपनाना आपके लिए बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं शास्त्र इन विशेष पौधों के बारे में।
श्री कृष्ण के अनुसार घर के पास नहीं लगाने चाहिए ये 2 पेड़ | Vastu Tips for Plants
वास्तु शास्त्र में दिशाओं और तत्वों का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। भगवान श्री कृष्ण ने भी प्रकृति के महत्व को समझाया है, लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर कुछ पेड़ों को अशुभ की श्रेणी में रखा गया है। मुख्य रूप से दो प्रकार के पेड़—कांटेदार पेड़ और दूध वाले पेड़—घर के पास होने पर दरिद्रता का कारण बनते हैं।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| मुख्य विषय | वास्तु शास्त्र और अशुभ पेड़ |
| वर्जित पेड़ के प्रकार | कांटेदार और दूध (Milk) निकलने वाले पौधे |
| प्रमुख प्रभाव | धन हानि और नकारात्मक ऊर्जा |
| वैज्ञानिक कारण | सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम |
| सुझाव | घर से दूर या मंदिर में लगाएं |
| वैकल्पिक शुभ पौधे | तुलसी, मनी प्लांट, आंवला |
| स्त्रोत | पौराणिक ग्रंथ एवं वास्तु शास्त्र |
कांटेदार पेड़ (Thorny Plants) और उनके प्रभाव
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या आंगन में कांटेदार पौधे जैसे कि कैक्टस, बबूल या बेर का पेड़ कभी नहीं लगाना चाहिए। माना जाता है कि इन पौधों के तीखे कांटे घर के सदस्यों के बीच चुभन और विवाद पैदा करते हैं। श्री कृष्ण के अनुसार, जिस घर में कांटेदार झाड़ियाँ होती हैं, वहां अशांति का वास होता है और व्यापार में बाधाएं आती हैं।
इन पौधों को घर में लगाने से धन का आगमन रुक जाता है और संचित धन भी धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है। इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण यह भी है कि ये पौधे बच्चों और पालतू जानवरों के लिए असुरक्षित हो सकते हैं। हालांकि, गुलाब को इसका अपवाद माना गया है क्योंकि वह अपनी खुशबू और सुंदरता के लिए जाना जाता है, लेकिन इसे भी सही दिशा में लगाना चाहिए।
दूध वाले पेड़ (Milky Sap Trees) से बचें
दूसरे प्रकार के पौधे वे हैं जिन्हें काटने या तोड़ने पर सफेद दूध जैसा पदार्थ निकलता है, जैसे कि महुआ, बरगद या पीपल (यदि वे घर की दीवार के पास उगें)। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसे पौधे घर में “शोक” और “आर्थिक तंगी” लाते हैं। माना जाता है कि इनसे निकलने वाला तरल पदार्थ नकारात्मक ऊर्जा को सोखता है और घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।
पीपल और बरगद जैसे पेड़ धार्मिक रूप से अत्यंत पूजनीय हैं, लेकिन इनकी विशाल जड़ें घर की नींव को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए, शास्त्रों में इन्हें मंदिर या खुले मैदान में लगाने का विधान है, न कि घर के बिल्कुल पास। यदि ये पौधे अपने आप घर की छत या दीवार पर उग जाएं, तो इन्हें सावधानीपूर्वक हटाकर दूसरी जगह लगा देना चाहिए।
अन्य अशुभ पौधे और वास्तु नियम
उपरोक्त दो प्रमुख प्रकारों के अलावा, कुछ अन्य पौधे भी हैं जिन्हें इनऑस्पेशियस (Inauspicious) माना गया है। उदाहरण के लिए, कपास का पौधा घर में नहीं होना चाहिए क्योंकि यह गरीबी का प्रतीक माना जाता है। इसी तरह, इमली का पेड़ भी घर के पास नहीं होना चाहिए क्योंकि लोक कथाओं के अनुसार इस पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव जल्दी पड़ता है।
वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में कभी भी बड़े और भारी पेड़ नहीं लगाने चाहिए। यह दिशा भगवान का स्थान मानी जाती है, इसलिए यहाँ केवल छोटे और पवित्र पौधे जैसे तुलसी ही लगाने चाहिए। दक्षिण या पश्चिम दिशा में बड़े पेड़ लगाना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि वे दोपहर की भारी गर्मी को रोकते हैं।
- तुलसी का पौधा हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
- सूखे हुए पौधे तुरंत घर से हटा दें, क्योंकि ये मृत्यु और विनाश का प्रतीक हैं।
- बोनसाई पौधों से बचें क्योंकि वे “रुकी हुई प्रगति” का संकेत देते हैं।
इन नियमों का पालन करके आप अपने घर के वातावरण को सकारात्मक बना सकते हैं। प्रकृति हमेशा मनुष्य का कल्याण करती है, बस हमें यह चुनाव करना होता है कि कौन सा पौधा हमारे व्यक्तिगत स्थान (घर) के लिए सही है और कौन सा सार्वजनिक स्थान (जंगल या मंदिर) के लिए।


















